उत्तराखंड प्रारंभिक शिक्षा प्रणाली पर PAB 26-27 की रिपोर्ट में प्रश्न चिन्ह क्या इन हालातो में सुधरेगा मेरे नौनिहालों का भविष्य

प्रारंभिक शिक्षा: संरचनात्मक कमियां एवं प्रणालीगत व्यवधान

​ उत्तराखंड सरकार की उपलब्धियों के समानांतर PAB के दस्तावेजों में राज्य की प्रारंभिक शिक्षा प्रणाली में कई गंभीर विसंगतियों को भी रेखांकित किया गया है। इनमें सबसे प्रमुख चिंता सरकारी विद्यालयों से निजी गैर-सहायता प्राप्त विद्यालयों की ओर छात्रों का व्यापक पलायन है। एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (UDISE+) के अनुसार, उत्तराखंड में कुल 22,551 विद्यालयों में से 71.84% (16,201) विद्यालय सरकारी क्षेत्र में हैं, जबकि निजी गैर-सहायता प्राप्त विद्यालय मात्र 23.29% (5,252) हैं। इसके विपरीत, कुल छात्र नामांकन में सरकारी विद्यालयों का हिस्सा गिरकर केवल 36.68% (8.7 लाख छात्र) रह गया है, जबकि निजी विद्यालयों में 54.39% (12.90 लाख छात्र) नामांकित हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इस विषम अनुपात पर चिंता जताते हुए राज्य को निर्देश दिया है कि वह सरकारी स्कूलों की विश्वसनीयता और ‘ब्रांड वैल्यू’ को पुनः स्थापित करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए।

​पर्वतीय जनपदों से हो रहे निरंतर जनसांख्यिकीय पलायन (Migration) के कारण प्रारंभिक विद्यालयों में कम नामांकन (Low-Enrolment Schools) की विकट समस्या उत्पन्न हो गई है। राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं जहां कुल छात्र संख्या 15 से भी कम रह गई है। इसके चलते बड़ी संख्या में स्कूल एकल-शिक्षक (Single-Teacher Schools) व्यवस्था पर निर्भर हो गए हैं, जहां एक ही शिक्षक को सभी कक्षाओं के बहु-कक्षा शिक्षण (Multi-grade teaching) और गैर-शैक्षणिक प्रशासनिक कार्यों का निर्वहन करना पड़ता है।

​अकादमिक पर्यवेक्षण के स्तर पर भी भारी शिथिलता पाई गई है। ब्लॉक स्तर पर शैक्षणिक नेतृत्व प्रदान करने वाले ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (BRP) के 285 पद और संकुल स्तर पर क्लस्टर रिसोर्स पर्सन (CRP) के 670 पद—कुल 955 पद—स्थानीय सेवा विवादों और विधिक जटिलताओं के कारण लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। यद्यपि राज्य ने बाह्य एजेंसियों और रोजगार पोर्टलों के माध्यम से भर्ती की कवायद की है, परंतु संकुल स्तर पर अकादमिक समर्थन तंत्र अभी भी पूरी तरह सक्रिय नहीं हो सका है।

​अवसंरचना के मोर्चे पर स्वीकृत पूंजीगत व्यय का समयबद्ध उपयोग न होना एक अन्य प्रमुख कमी है। PAB समीक्षा में यह संज्ञान में आया कि पूर्व अनुमोदित 1,042 निर्माण कार्य प्रारंभ ही नहीं किए जा सके, जिसके कारण लगभग ₹100 करोड़ की केंद्रीय धनराशि अनुपयुक्त रहकर लैप्स हो गई। अतिरिक्त कक्षा-कक्षों और आवश्यक जीर्णोद्धार कार्यों का यह बैकलॉग पर्वतीय विद्यालयों में सीखने के सुरक्षित और सुदृढ़ परिवेश को बाधित करता है।

अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके पबhttps://www.dsel-education.gov.in/static/uploads/2026/06/d908d41b37ccc9587343152584d9984b.pdf की पूरी मिनट कार्यवाही को पढ़ें

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